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रंग पंचमी: उत्सव की आड़ में अपराध नहीं, अनुशासन चाहिए

संपादिका :  सौ . सीमा राजेंद्र वखरे

CRIME BORDER | 02 March 2026 | 05:26 PM

रंग पंचमी: उत्सव की आड़ में अपराध नहीं, अनुशासन चाहिए

रंग पंचमी, होली के पांचवें दिन मनाया जाने वाला उल्लास और उमंग का पर्व है। मान्यता है कि इस दिन वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और रंगों के माध्यम से मन के विकारों को दूर किया जाता है। पारंपरिक रूप से गुलाल, अबीर और फूलों के रंगों से आपसी प्रेम, भाईचारा और सामाजिक एकता का संदेश दिया जाता रहा है। कई क्षेत्रों में यह दिन विशेष रूप से सामूहिक उत्सव, लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के रूप में मनाया जाता है।


लेकिन पिछले कुछ वर्षों में रंग पंचमी की तस्वीर चिंताजनक भी हुई है। जबरन रंग लगाना, महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार, पानी के गुब्बारों से चोट पहुँचाना, रासायनिक रंगों का उपयोग और शराब के नशे में हुड़दंग—ये सब उत्सव नहीं, कानून का उल्लंघन हैं। “त्योहार है” कहकर किसी की असहमति को अनदेखा करना सीधा-सीधा अपराध की श्रेणी में आता है। कई शहरों में छेड़छाड़, सड़क दुर्घटनाएं और मारपीट की घटनाएं प्रशासन के लिए सिरदर्द बनती जा रही हैं।


समय आ गया है कि रंग पंचमी को अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ मनाया जाए। प्राकृतिक और त्वचा-सुरक्षित रंगों का उपयोग हो, पानी की बर्बादी रोकी जाए, और सबसे महत्वपूर्ण—हर व्यक्ति की सहमति का सम्मान किया जाए। स्थानीय प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ानी चाहिए और समाज को भी गलत आचरण पर मौन दर्शक नहीं, बल्कि सजग नागरिक बनना होगा।


रंग पंचमी का असली अर्थ है मन के द्वेष को धोना, न कि कानून और मर्यादा को तोड़ना। यदि हमने संयम और संस्कार को प्राथमिकता दी, तो रंग खुशियों के प्रतीक बनेंगे; अन्यथा यही रंग समाज के दामन पर दाग भी छोड़ सकते।