Crime Border Editorial Team • 01 Feb 2026
भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स ने लोगों के जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है। आज पहचान की चोरी, बैंक फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी, फर्जी निवेश योजनाएं और सोशल मीडिया ब्लैकमेलिंग जैसे अपराध आम होते जा रहे हैं।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि आम नागरिकों में साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभी भी सीमित है। लोग अनजान लिंक पर क्लिक कर देते हैं, ओटीपी साझा कर देते हैं और अपनी निजी जानकारी बिना सोचे समझे इंटरनेट पर डाल देते हैं। अपराधी इसी लापरवाही का फायदा उठाते हैं।
सरकारी स्तर पर भी चुनौतियां कम नहीं हैं। साइबर अपराधों की जांच के लिए विशेष तकनीकी संसाधनों और प्रशिक्षित अधिकारियों की आवश्यकता होती है, जो अभी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। कई मामलों में अपराधी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होते हैं, जिससे जांच और भी जटिल हो जाती है।
समाधान केवल कानून सख्त करने से नहीं होगा। इसके लिए डिजिटल शिक्षा, जागरूकता अभियान और तकनीकी सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना जरूरी है। स्कूल स्तर से ही साइबर सुरक्षा की जानकारी दी जानी चाहिए।
यदि समाज, सरकार और तकनीकी संस्थान मिलकर काम करें, तो इस चुनौती को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अन्यथा डिजिटल क्रांति के साथ साइबर अपराध भी उसी गति से बढ़ते रहेंगे।
Rajendra Vakhare